Wednesday, September 24, 2014

धूप और छांव की इबारतें

धूप और छांव की इबारतें
किसी दीवाने की तरह
रोज़ कुछ लफ़्ज लिखती है
कोई गीत सा गुनगुनाती हैं
अपने दिल की बात कहती हैं
शायद ऐसी ही सुंदर इबारतें
चांदनी रात भी लिखती होगी
अपने पढ़े जाने की उम्मीद में...

2 comments:

  1. बहुत-बहुत शुक्रिया हरकीरत 'हीर' जी।

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